महाराजा हरि सिंह का जम्मू एवं कश्मीर और धारा 370 के बारे में कुछ जाने रोमांचित बातें !

लखनऊ | भारत में ब्रिटिश साम्राज्य में एक रियासत जम्मू एवं कश्मीर 1846 से 1952 तक था ,और जामवाल का राजपूत डोगरा राजवंश में शासन था । प्रथम राज्य आंग्ल सिख युद्ध के बाद 1846 में बनाया गया था । ईस्ट इंडिया कंपनी के सिखों से कश्मीर घाटी,लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान पर कब्जा कर लिया है, और फिर 7,500,000 नानकशाही रुपये की क्षतिपूर्ति भुगतान के बदले में गुलाब सिंह को यह स्थानांतरित कर दिया ।

Maharaja Hari Singh of Jammu and Kashmir, and about 370 points higher thrilled!
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भारतीय स्वतंत्रता के समय महाराजा हरि सिंह राज्य के शासक स्वतंत्र हो जाते हैं और भारत या पाकिस्तान के उत्तराधिकारी के उपनिवेश के बीच तटस्थ रहने को प्राथमिकता दी । हालांकि, राज्य के पश्चिमी जिलों के पड़ोसी उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत में एक विद्रोह से हमलावरों द्वारा एक हमले के बाद,कथित तौर पर पाकिस्तान द्वारा समर्थित है, आजादी के लिए अपनी योजनाओं को खत्म कर दें । 26 अक्टूबर 1947 पर,महाराजा सैन्य सहायता के बदले में भारत डोमिनियन में शामिल होने के विलय पर हस्ताक्षर किए । वर्तमान में  पश्चिमी और उत्तरी जिलों को हम आजाद कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान के रूप में जानते हैं ।

यह एक सच्चाई है कि भारतीय संविधान की धारा 370 के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के अलग संविधान ने कश्मीर घाटी के अधिकांश मुस्लिम युवकों को भारत की मुख्य राष्ट्रीय धारा से जुड़ने नहीं दिया। प्रादेशिक संविधान की आड़ लेकर जम्मू-कश्मीर के सभी कट्टरपंथी दल और कश्मीर केन्द्रित सरकारें भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय महत्व के प्रकल्पों और योजनाओं को स्वीकार नहीं करते। भारत की संसद में पारित पूजा स्थल विधेयक, दल बदल कानून और सरकारी जन्म नियंत्रण कानून को जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं किया जा सकता।Weboworld Link Directory

विशेष अधिकार

धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।

Jammu and Kashmir, and about 370 points higher thrilled!
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इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती।
इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।

1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।

Jammu and Kashmir, and about 370 points higher thrilled!
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इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।

भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।

जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय करना ज़्यादा बड़ी ज़रूरत थी और इस काम को अंजाम देने के लिये धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को उस समय दिये गये थे। ये विशेष अधिकार निचले अनुभाग में दिये जा रहे हैं।

विशेष अधिकारों की सूची

1. जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है।

2. जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है।

3. जम्मू – कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।

4. जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है।

5. भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं।

6. भारत की संसद को जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यन्त सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है।

7. जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी। इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी।

8. धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागू नहीं है, RTE लागू नहीं है, CAG लागू नहीं है। संक्षेप में कहें तो भारत का कोई भी कानून वहाँ लागू नहीं होता।

9. कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है।

10. कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं।

11. कश्मीर में चपरासी को 2500 रूपये ही मिलते है।

12. कश्मीर में अल्पसंख्यकों [हिन्दू-सिख] को 16% आरक्षण नहीं मिलता।

13. धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं।

14. धारा 370 की वजह से ही कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है।

Jammu and Kashmir, and about 370 points higher thrilled!
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