freedom of expression or country engaged in jnu Deshvirodhi slogans ???

jnu में लगे देशविरोधी नारे अभिव्यक्ति की आज़ादी है या देश की बर्बादी ???

 लखनऊ | मुझे बहुत दुःख होता है ,कि आज हमारे देश भारतवर्ष की राजनीती इतने गर्त में चली गई है जहा हर एक पार्टी को केवल मात्र राजनितिक कुर्सी ही नज़र आ रही है । हमारे नेता जो देश के प्रजापालक है वो आज अपना ध्यान केवल वोट बैंक पर केंद्रित करते है,बाकि न तो उन्हें आज प्रजा की चिंता है न तो पठानकोट , कश्मीर आदि में हुई सैनिको की शहादत पर दुख। वे समस्त बातो को परे  रखकर केवल वोट बनाने और अपनी पार्टी को बेहतर साबित करने में लगे है । आज वे गद्दारो का साथ दे रहे है ।

 freedom of expression or country engaged in jnu Deshvirodhi slogans ???

                                 freedom of expression or country engaged in jnu Deshvirodhi slogans ???

मैंने जिसे एक कविता के माध्यम से व्यक्त करने की कोशिश की है :-

मान बढ़ाते है वे देश का ,देश की रक्षा करते है ।
छोड़ छाड़ घर बार बिचारे ,दुश्मन से वो लड़ते है।।

भारत माता के वीर पुत्र ,जो सीमा पर सहिद हुए ।
आज उन्हें छोड़ सत्ता के पालक ,गद्दारो का साथ दिये।।

कुर्सी के इस तुक्ष लोभ में,हुई सहादत भूल गए ।
राजनीती के कथाकथित ,गद्दारो का साथ दिये।।

आज हमारे नेता अफज़ल गुरु ,इशरत जहाँ ,मकबूल भट्ट जैसे आतंकवादियों के समर्थको का साथ दे रहे है । जो भारत देश में रहकर ,भारत माता की जय बोलने से कतराते है ,जिनके लिए तिरंगे झंडे ,राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत कोई मायने नई रखता , जो भारत में रहकर पाकिस्तान जिंदाबाद ,भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी ,कश्मीर हम ले के रहेंगे जैसे नारे लगते है वे गद्दार नहीं तो क्या है ? और ऐसे गद्दारो का साथ हमारे नेता बखूभी निभा रहे है । आज अखंड भारतवर्ष का खंडन होता चला जा रहा है। कभी जातिवाद ,तो कभी आरक्षण के नाम पर दंगे , कभी हिन्दू मुस्लिम के नाम पर दंगे तो ,कभी दलित के नाम पर लम्बा चौड़ा भाषण औरबहस आखिर ये सब क्या है ? क्या देश का खंडन होना विकास है?

आज हर एक भारतीय युवा के मन में केवल एक सवाल है क्या हमारा देश और हम प्रगति की दिशा में अग्रसर है या हम पतन की ओर बढ़ रहे है ?
अगर हम प्रगति की ओर है ,तो क्या ये दंगे फसाद , ये गन्दी राजनीती ,अलगाववादी भाषण विकास के लक्षण है ?

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