How long the reservation will burn in the fire of India

आखिर कब तक आरक्षण की आग में जलेगा भारतवर्ष

आज भारतवर्ष इक ऐसे आतंरिक आग से जल रहा है जो की बाहर से आये आंतकवादियो के आतंक से भी ज्यादा दुखदायी है । आज हमारा  देश उसी के देशवासियो के द्वारा मचाये गये  हिंसा ,उत्पात ,दंगे एवम फसाद की आग से जल रहा है । आज हिंसा ,बलात्कार ,तोड़ -फोड़ हर गली मोहल्ले ,नगर एव जगह जगह व्याप्त है ।

How long the reservation will burn in the fire of India
How long the reservation will burn in the fire of India

आज संस्कृति ,वेद एवम एकता का प्रतिक हमारा अखंड भारत वर्ष खंडित होता चला जा रहा है, कभी जातिवाद के नाम पर ,तो कभी आरक्षण के नाम पर । आज एकता के प्रतीक भारत वर्ष में अनेकता  व्याप्त हो गई है । कभी पटेल आरक्षण (गुजरात) तो कभी गुर्जर आंदोलन (राजस्थान), तो अब जाट आरक्षण आखिर कब तक ये देश जाती, वर्ग, वर्ण और आरक्षण के नाम पर जलता रहेगा ।

How long the reservation will burn in the fire of India
How long the reservation will burn in the fire of India

“क्या इसके पीछे किसी का लाभ है या राजनीतिक पार्टियों का हाथ ?” आखिर अब तक ये कहाँ थे ,पहले क्यों नई आये ये आरक्षण माँगने? आखिर ये आगजनी ,दंगे ,तोड़-फोड़ ,क्या ये आरक्षण माँगने के तरीके है ,अगर हा तो इसमें हुए नुकसान की  भरपाई कौन करेगा आरक्षण की मांग करने वाला वर्ग क्या कोई और ?

How long the reservation will burn in the fire of India
How long the reservation will burn in the fire of India

मेरा समस्त आरक्षण मांगने वालों से केवल एक प्रश्न है कि क्यों किसी ने भी औरंगज़ेब और अंग्रेजो के शासनकाल में आरक्षण के लिए आवाज़ नहीं उठाई ? तब आप सब कहाँ थे, क्या तब आपको आरक्षण की ज़रुरत नहीं थी?

आखिर तब आप मांग भी कैसे सकते थे ,क्योकि तब हम सभी अपने ही घर में गुलाम थे । तब न तो हमारे पास अभिव्यक्ति की आज़ादी थी न ही हमारे स्वयं की । हाँ उस समय भी आवाज़ उठी थी ,वो आवाज़ थी  इंकलाब के नारों की, भारत माता के जय की, हमारी आज़ादी की और वो आवाज़ उठाने वाले ना तो ब्राह्मण थे ,ना छत्रिय ,ना हिन्दू ,ना मुस्लिम ,ना सिक्ख ,ना ईसाई ,और ना ही दलित वे समस्त भारतवासी थे ,जिनके अंदर सारी  जाती ,वर्ग, संप्रदाय आते थे । सबने मिलकर एक स्वर में आवाज़ उठाई जिसकी वजह से आज हम स्वतंत्र है । आज हमारे पास समस्त बातो की आज़ादी है ,तो क्या हम उस आज़ादी का इस तरह प्रयोग करेंगे ? अगर इस तरह हमने अपनी आज़ादी का इस्तेमाल किया तो हम प्रगति की दिशा में नहीं ,बल्कि पतन की ओर जायेंगे और फिर कोई बहार से आकर हमारे ऊपर राज करेगा ।

भारत का भविष्य अब आपके हांथो में है ,फैसला आपका कि आप देश को किस दिशा में ले जाना चाहते है ? समानता में एकता वाला भारत देश जो आजादी के समय था या ऐसा आरक्षण, जातिवाद एवं धर्म के नाम पर बंटता हुआ भारतवर्ष ।

जय हिन्द
हिमांशु मिश्रा

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