Now we need to change the mindset towards women

अब जरूरत है हमें महिलाओं के प्रति सोच बदलने की

 

आज हमारी गवर्नमेंट महिला सुरक्षा के लिए कोई भी कदम क्यों न उठा ले ,तब भी अपराध जारी है । कहीँ रक्षक ही भक्षक बन गए हैं , कही कभी रिश्ते नापाक । आज न तो रिश्तों का को वज़ूद है ,ना कानून का और ना ही इस मूक दर्शक समाज ।

Now we need to change the mindset towards women
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आज की दुनीयाँ में औरतों के प्रति अत्याचार ,एक कठपुतलियों का खेल बनकर रह गया हैं।  जैसे कठपुतलियों कि बागडोर उनके सन्चालन कर्ता के पास होती है ,बाकि लोग दर्शक बनकर लुफ्त उठाते है,वैसे ही आज औरतों की बागडोर दरिंदो के हाथों में है,वो जहाँ चाहें जैसे चाहें वैसे फब्तियां कसते है, महिलाओ और राह चलती लड़कियों को छेड़ना ,बलात्कार ,हत्या आज उनके लिए आम बात बन गयी हैं,और हम मूक दर्शक बने देखते रह जाते है ।

Now we need to change the mindset towards women
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कुछ न्यूज़ पेपर पर या टीवी पर देखते है ,थोड़ी बहुत गालियाँ बकते है और अफ़सोस जताते हैं फिर पुनः अपनी दुनियां और काम में व्यस्त। और अगर मीडिया ने  बढ़ा-चढ़ा दिया तो फिर क्या  काली  पट्टी बांधकर ,हाथो में जलती मोमबत्ती और पोस्टर लेकर निकल पड़ते है जुलूस निकालने के लिए,पूरे शहर में अशांति फ़ैलाने और खासकर ये जताने हमसे बड़ा हमदर्द कोई और नहीं है, हम बहुत दुखित है ।
आज हमारा  प्रदर्शन दरिंदो के प्रोत्साहन का कारण बन गया है। आज औरतों पर जो हिंसा हो रही है वो ऐसे नहीं ख़त्म होगी , वो तभी ख़त्म हो सकती है जब हम अपने आप में बदलावलाएंगे,अपनी सोच में बदलाव लाएंगे ,अपने और पराये को दिमाग से निकाल कर खुद को उस जगह रखकर देखेंगे । क्योकि ये दरिंदे कोई और नहीं हमी(हम) आप है।

Now we need to change the mindset towards women
Now we need to change the mindset towards women

अब भीं कुछ नई बिगड़ा है ,केवल एक आवाज़ उठानी है । कोई  गलत कर रहा हो तो उसे रोकना ही तो है। बस ,ऑटो ,टैक्सी आदि को तो हाथ दे के रोक लेते है तो औरतों के प्रति हिंसा रोकने के लिए एक आवाज़ क्यों नहीं उठाते ,क्यों इंतज़ार करते है किसी दूसरे का । सही के लिए तो सभी आवाज़ उठाते है ,भूख लगे तो बोल कर जताते है ,चोट लगे तो चिल्लाते है ,और अगर कही कुछ गलत हो रहा हो तो मूकदर्शक क्यों बन जाते हैं । क्या आपको अपने ऊपर विश्वास नहीं ,अरे एकबार आवाज़ उठा के तो देखो की कितनी ताकत है इसमें ।

हिंसा रोकने के लिए केवल एक आवाज़ ही काफी है ,आपकी आवाज़ कब दरिंदो के लिए आग बन जाएगी ये आपको भी नहीं पता चलेगा । आज भी समय है ,अब भी मौका है  बुनियाद स्वयं बनाओ और महिला हिंसा को जड़ से समाप्त करो ।

धन्यवाद
हिमांशु मिश्रा

हिमांशु मिश्रा