kam bolta hi nahi dikhta bhi hai !

काम बोलता ही नही दिखता भी है मुख्यमंत्री जी !

इलाहबाद । इसमे कोई संदेह नही कि काम बोलता है और काम बोल भी रहा है काम भी ऐसे ऐसे कि काम ही नही पूरा प्रदेश बोल रहा है सड़कछाप के कार्यकाल मे परीक्षा देने वाले छात्र भी बोल रहे है और 64 मे 54 एस डी एम भी बोल रहे है (जाति विशेष के ) , हर भर्ती परीक्षा का पेपर आउट करने वाले ,करवाने वाले और नौकरी के लिए नेता जी के यहां दस लाख रूपए ना पहुंचा पाने वाले किसान के लडके भी बोल रहे है |

kam bolta hi nahi dikhta bhi hai !
kam bolta hi nahi dikhta bhi hai !

समाजवादी पुलिस सेवा के लाठियो से पिटे /पिटवाये गये नौकरी मांग रहे बेरोजगार युवा भी बोल रहे है और गुंडो द्वारा हर चौथे दिन पिट रहे खुद खाकी वाले भी बोल रहे है , हाईवे पर दरिंदगी का शिकार बुलंदशहर भी बोल रहा है और सगी बहनो की लाशों के साथ टंगा बंदायू भी बोल रहा है |

चचा के खासमखास नक्सली रामवृक्ष के बर्बरता का शिकार जवाहर बाग भी बोल रहा है और गुंडों बदमाशों और ईनामिया अपराधियों का विलय भी बोल रहा है चचा भतीजे के नाटक का गवाह लखनऊ भी बोल रहा है और भ्रष्टाचार के बड़े बड़े गड्ढो के बीच कहीं कहीं दिख जा रहीं सड़कें भी बोल रही है गौहत्या के अपराधी को फ्लैट और 45 लाख और निर्दोष युवा रवि के हत्या का गवाह दादरी भी बोल रहा है |

kam bolta hi nahi dikhta bhi hai !
kam bolta hi nahi dikhta bhi hai !

दंगों मे झुलसा मुजफ्फरनगर भी बोल रहा है और ‘साहब’ के फोन से दंगाइयो को छोड़ देने वाले दीवान जी भी बोल रहे है , पानी को तरसता ,अपनी किस्मत पर रोता बुंदेलखंड भी रो रहा है और अपनी किस्मत पर इठलाता ,बालीवुड के ठुमको पर झूमता सैफई भी बोल रहा है कश्मीर बनता जा रहा कैराना भी बोल रहा है चार करोड़ के रथ की तरह चक्काजाम हो चुकी अरबों करोड़ो के भ्रष्टाचार की प्रतीक प्रोजेक्ट भी बोल रहे हैं |

kam bolta hi nahi dikhta bhi hai !
kam bolta hi nahi dikhta bhi hai !

और अभी से गिर रहे लखनऊ मेट्रो के फ्लाईओवर भी बोल रहे हैं टीईटी ,टीजीटी ,पीजीटी ,यूपीपीसीएस ,पुलिस भर्ती ,चपरासी भर्ती, लेखपाल वीडीओ …की परीक्षाओ की तैयारी करने वाले छात्र तो हाईकोर्ट ,सुप्रीम कोर्ट मे भी बोल रहे है क्या युवा ,क्या अधेड़ ,क्या बुजुर्ग पश्चिम से पूर्वांचल तक साथ मे अवध और बुंदेलखंड भी पूरा उत्तर प्रदेश बोल रहा है कि #परिवर्तन_परिवर्तन_परिवर्तन ना गुंडाराज , ना भ्रष्टाचार , ना तुष्टिकरण ना झुनझुना सिर्फ काम ,काम और काम #क्योंकि_काम_बोलता_ही_नही_दिखता_भी_है ।

पंडित गौरव पांडेय के कलम से ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *