Learn relaxation despite the age of 13 in the study of electricity and inventor James Faraday's inspiring biography of benzene!

दूसरों के घरों में मजदूरी करने वाले युवक ने आकाश से कहर बरपाने वाली बिजली को कैसे बनाया एक आज्ञाकारी सेवक ??

इलाहाबाद । मै आपकी पूरी फीस तो नही तो चुका सकता ,लेकिन दूसरे तरीके से आपकी भरपाई कर दूंगा ।मै आपकी शागिर्दी के एवज में आपके घर का काम, जूता पालिश और साफ सफाई  तक का काम करने को तैयार हूं । 21 साल का वह युवक उस  फ्रांसीसी चित्रकार के सामने गिड़गिड़ाने की मुद्रा मे था । उसकी बात सुनकर चित्रकार का मन पिघल गया और वह बोला मतलब रेखांकन सीखने के लिये तुम कुछ भी करने को तैयार हो ।

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जी हां ,बिलकुल

तो ठीक है ,आज से तुम्हारा घर घर अखबार बांटने का जिल्दसाजी करने का काम खत्म ,अपने मालिक को यह बात बताकर मेरे पास आ जाना ।

घनघोर गरीबी में पले बढे उस ब्रिटिश युवक की आंखो मे एक सपना तैर रहा था ।लालटेन की रोशनी में यहां वहां से जुटाई किताबें पढने वाला वह युवक एक महान वैज्ञानिक बनना चाहता था ।ऐसा वैज्ञानिक जिसे दुनिया उसके नाम से जाने ।
लेकिन भला इसके लिये किसी चित्रकार के पास जाने की क्या जरूरत थी ?

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दरअसल उस युवक ने कुछ दिन पहले महान वैज्ञानिक सर हंफ्रे डेवी का व्याख्यान सुना था । सर डेवी का व्याख्यान सुनने के बाद उसे लग रहा था कि सर डेवी ही वह शख्श हैं जो उसके सपनो को पूरा कर सकते हैं ।उसने सर हंफ्रे डेवी के चार व्याख्यान सुने और उनका सार लिखा । उसने सोचा कि यदि वह इन व्याख्यानो को रेखांकन सहित पुस्तक का रूप देकर सर हंफ्रे डेवी को भेज दे तो शायद खुश होकर वह मिलने का मौका दे दें । किताबो की दुकान पर काम करने के कारण उसे जिल्दसाजी का अच्छा अनुभव था । किताबो के दुकान पर काम करने के दौरान खाली समय में वह भौतिकी के किताबों मे डूब जाता था । लेकिन रेखांकन करना अभी दूर की कौड़ी थी । किंतु उस युवक ने सम्पूर्ण समर्पण भाव का परिचय देते हुए उस चित्रकार को अपना गुरू बनाया और कुछ ही महीनो मे पुसतक पूरा कर सर डेवी को भेज दिया ।

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अब वह एक एक दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था । नौकरी छूटने के बाद वह अपने मां और बहन के पालन पोषण के लिये खिड़कियो के कांच साफ करने लगा।बचे हुए पैसों से वह भौतिक विज्ञान की पुस्तकें लाता और उसमें डूब जाता । एक बेहतर भविष्य के प्रति उसकी आशा इतनी प्रबल थी कि वह लालटेन की आखिरी बूंद तक पढता और अगले दिन हाड़तोड़ मेहनत करने को सो जाता । क्रिसमस की पूर्व संध्या पर उसे रायल इंस्टीट्यूसन में सर डेवी से मिलने का निमंत्रण प्राप्त हुआ ।अत्यंत कठिन परिस्थितियों मे पले बढे उस युवक के लिये यह उसकी जीवन का सबसे बड़ा क्रिसमस गिफ्ट था ।

सर हंफ्रे डेवी ने मुलाकात के दौरान उस युवक से पूछा कि क्या वह उनका सहायक बनेगा ?
उस युवक ने जो सपना खुली आंखो से देखा था वह आज सच हो रहा था ।लेकिन यह तो शुरूआत भर था ।सर डेवी के सान्निध्य में उस युवक ने भौतिक विज्ञान के साथ रसायन विज्ञान का भी अध्ययन शुरू कर दिया था ।एक समय ऐसा आया कि सर हंफ्रे डेवी लम्बी विदेश यात्रा पर गये हुए थे और उस समय लंदन की प्रयोगशाला में जूझते हुए उस युवक ने #स्टेनलेस_स्टील का खोज कर डाला । वह क्लोरीन गैस को द्रव में बदलने मे सफल रहा और कई नए यौगिकों की खोज की ।

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सर डेवी के लौटने के बाद उसने चुम्बकीय विद्युत पर काम शुरू किया और सन 1821 मे दुनिया की पहली मोटर बना डाली । इसके दस साल बाद उसने चुम्बक से बिजली बनाने का सफल प्रयोग कर दुनिया भर के वैज्ञानिको को दांतो तले उंगली दबाने को मजबूर कर दिया । इस विद्युत चुम्बकीय मशीन के रूप में #माईकल_जेम्स_फैराडे ने सम्पूर्ण विश्व के मानव को बिजली का उपहार दिया । अभी तक लोगों ने जिस शक्ति को आकाश से तबाही मचाते देखा था अब वही आज्ञाकारी सेवक की तरह उनके घरो और जिंदगी को रौशन करने वाली थी और इसे सम्भव किया था माईकल फैराडे ने ।

अटूट लगन और अवसर न चूकने वाली इच्छाशक्ति ने अल्पशिक्षित माईकल फैराडे का सपना पूरा कर दिया था ।
कभी वह जिल्दसाजी करते हुए विज्ञान पुस्तको पर अपना नाम छपा होने का सपना देखते थे ।आज फैराडे का नाम विज्ञान की हर पुस्तक में पढा जाता है और हां लालटेन की रोशनी में नहीं ……बिजली की रोशनी में ।

बिजली और बेंजीन के अविष्कारक फैराडे का जन्म 1791 में न्यूंगटन मे हुआ था ।13 साल की उम्र मे ही पढाई छूट जाने के बावजूद उन्होने मैकेनिजँम और इलेक्ट्रो कैमिस्ट्री मे अतुलनीय योगदान दिया ।

गौरव पांडेय के कलम से

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