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विषम परिस्थितियों में भी पर्यावरण रक्षा का दृढ संकल्प

इलाहाबाद | गर्मियों में नीम की निमौली एकत्र करने और उन्हें बेंचकर प्राइमरी की पढ़ाई करने वाले युवक को आगे  बढ़ने से कोई बाधा कभी रोक नहीं पाई। जब उन्होंने स्नातक करने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया तो रहने के लिए छात्रावास तो  मिल गया ,पर उनके पास विश्वविद्यालय की फीस कापी किताबों के लिए कोई पैसा नहीं था ।

IMG-20170605-WA0056अंधेरे में भी प्रकाश की किरण खोज लेनेवाले इस युवक ने एक दिन देखा कि प्रातः पांच बजे अंधेरे में ही छात्रावास के कई कमरों में बारह तेरह साल का एक लड़का अखबार डालता हुआ तेजी से आता है ।इस युवक को भी रोशनी मिल गई और उसी दिन से इसने भी रेलवे स्टेशन पर सुबह अखबार बेचना प्रारंभ कर दिया और पढ़ाई जारी रखी ।पढ़ाई पूरी हुई तो जीवनयापन के लिए नौकरी की तलाश थी। कोई अच्छी नौकरी मिलती की प्रतीक्षा में जो भी छोटी नौकरी मिली उसीमें काम करने लगे ।

समय के सदुपयोग व सेवा का स्वभाव बचपन से था अतः नौकरी करते हुए खाली समय में झुग्गी झोपड़ी के बच्चों को नि:स्वार्थ पढ़ाने लगे ।कहते हैं सेवा का फल मीठा होता है, इस युवक को भी सेवा के फल के रुप में उड़ीसा के केंद्रीय विद्यालय में नौकरी मिल गई और वे  वहां चले गए ।

एक दिन झुग्गी झोपड़ी के छात्रों का पत्र मिला और उसने उनके जीवन की दिशा में एक नया मोड़ ला दिया। पत्र में बच्चों ने लिखा था ” गुरुजी आप हमको छोड़कर चले गए ,अब हमको कौन पढ़ाएगा “
भावुक पर दृढ़ निश्चयी इस युवक पर बच्चों के इस पत्र का गहरा प्रभाव पड़ा और इसनें जीवन की पहली दहलीज पर पाई हुई केंद्रीय विद्यालय की नौकरी छोड़ देने का निश्चय किया और लखनऊ वापस आ गए। युवा से प्रौढता की ओर बढ़ रहे जीवन में झुग्गी झोपड़ी के बच्चों की पढ़ाई के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए भी विविध कार्य करने में संलग्न रहते हुए पेड़ लगाना तो मानो उनका जीवन लक्ष्य बन गया है ।झुग्गी झोपड़ियो मे रहने वाले बच्चो को शिक्षा उपलब्ध कराना और पेड़ लगाना ही “आचार्य चन्द्रभूषण तिवारी “जी के जीवन का लक्ष्य बन गया है ।आचार्य जी ने गोमती नदी के किनारे दस लाख वृक्ष लगाने का संकल्प लिया है ।
हजरतगंज के चौपड़ अस्पताल परिसर स्थित ‘लोक भारती ‘ पत्रिका के कार्यालय में हुई एक मुलाकात के दौरान आचार्य जी ने बताया कि पौधों को वे अपनी बेटी मानते है और लखनऊ की गलियों मे घूम घूमकर दिन भर लोगों को वृक्ष लगाने को प्रेरित करते है और इच्छुक लोगों को पेड़ प्रदान करते हैं अर्थात उनके यहां अपनी बेटी का ब्याह कर देते है ।बदले में उनसे अपनी बेटी के सम्पूर्ण देखभाल का संकल्प दिलाते है ।
एक लाख वृक्ष लगाने का संकल्प लेकर अहर्निश प्रयत्नशीलता के प्रतीक बन कर उभरे इस प्रेरणा पुरुष को साइकिल से मोटरसाइकिल और पौधों से लदी मारुति वैन के साथ वृक्ष भंडारा करते हुए जगह-जगह प्रज्वलित दीप की तरह देखा जा सकता है ।
ऐसे ही संकल्पवान युवकों के अनेक उदाहरण अपने आसपास आपको मिल जाएंगे जिन्होंने कभी किसी कार्य को हीन नहीं माना ।संघर्ष से कभी घबराएं नहीं ,सरकारी नौकरी को ही जीवन का अंतिम अवलम्ब नहीं माना और आज अपनी कठिन साधना के बल पर समाज में स्थान बनाए हुए हैं ।

आज पर्यावरण दिवस के दिन मैं प्रणाम करता हूं आदरणीय आचार्य चन्द्रभूषण तिवारी जी को जो निरन्तर तन मन धन और बल से धरती माता की सेवा में लगे हुए हैं ,इस धरा को हरा भरा बनाए रखने को संकल्पित है और लाखो युवाओ के प्रेरणा स्रोत बने हुए है ।

गौरव पान्डेय

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