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राजनेता अटल बिहारी को हुआ था पांडेय जी की पोती से प्रेम, इसलिए हैं अब तक कुंवारे

राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी, यानि की लिविंग लेजेंड, एक ऐसे राजनेता जिनके बारे में जितनी बात की जाए कम ही होगा। जिन्होंने राजनीति से ऊपर देश की जनता के हित को ऊपर रखा और देश के सशक्त प्रधानमंत्री के रूप में उभर कर सामने आए। राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी अपनी कविताओं के ज़रिए काफी कुछ कह दिया करते थे और उन लोगों को सबक भी सिखा दिया करते थे जो उनसे या देश से उलझने की कोशिश किया करते थे।
atal vihariज़रा इस कविता पर ही नज़र डालिए। ‘हम सांप को दूध पिलाना जानते हैं तो सांप का फन कुचलना भी जानते हैं”। वो एक ऐसा दौर था जब देशवासी भी दिल से चाहते थे कि देश की राजनीति में कमल ही खिले और देशवासियों में कुशल नेतृत्व ही मिले। वाजपेयी की करीबी मित्र राजकुमारी, इंदिरा गांधी की कज़िन थी। ग्रेजुएशन के दौरान, विक्टोरिया कॉलेज में उनकी मुलाकात अटल जी से हुई। अगर जानकारों की मानें तो अटल ने उनके लिए किताब में प्रेमपत्र रख कर भेजा था लेकिन वो लव लैटर उन्हें नहीं मिल सका और फिर उनकी शादी कहीं और हो गई और अटल जी की प्रेम कहानी अधूरी रह गई। अटल बिहारी वाजपेयी  अपनी धुन के जितने पक्के थे उतने ही ह्यूमरस भी थे। किसी एक गोष्ठी के दौरान किसी ने उनसे पूछा कि ‘आपका नाम अटल है, टिककर तो रहिए’   तो वाजपेयी  ने तुरंत अपने अंदाज़ में जवाब दिया, ‘आगे बिहारी भी लगा है’।

एक बार ऐसी ही किसी बहस के दौरान बात राम मंदिर के मुद्दे पर चली तो विपक्ष में किसी ने राम मंदिर के मुद्दे पर कहा कि ‘राम तो मेरे नाम में लगा है, बीजेपी कहां से दावा कर रही है.’ इस पर अटल बोले, ‘नाम की न कहें, राम नाम तो हराम में भी होता है’। ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिनसे आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी कितने ह्यूमरस हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी पर कईं किताबें लिखी गईं हैं और इन्ही में से एक है ‘द अनटोल्ड वाजपेयी- पॉलिटीशियन एंड पैराडॉक्स’ जिनमें उनसे जुड़े कईं दिलचस्प किस्सों को उजागर किया गया है। राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी, देश के एक सशक्त नेता है, भले ही अब वो राजनीति से दूर हैं लेकिन फिर भी भारतीय जनता पार्टी में, देश की राजनीति में और देशवासियों के दिल में उनका स्थान बहुत खास है, इतना खास कि आज भी उनके सम्मान में देशवासियों का दिल रमता है। अब तो आप जान गए होंगें कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री जी अब तक क्‍यों कुंवारे हैं। अटल जी की प्रेम कहानी तो अधूरी ही रह गई।

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